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नन्हे कदम, सुनहरे सपने
मानसरोवर साहित्य अकादमी गर्व के साथ प्रस्तुत करती है दिनेश कुमार कीर की कविताओं का यह अनूठा संग्रह— "नन्हे कदम, सुनहरे सपने"। यह पुस्तक 5 से 10 वर्ष के बच्चों के लिए बचपन की चंचलता, प्रकृति के प्रेम और सपनों की उड़ान को शब्दों में पिरोती है। चलिए, नन्हे विहान के साथ इस काव्य यात्रा पर चलते हैं जहाँ हर पन्ना एक नई मुस्कान लेकर आता है।
चोंच है लाल और पंख हैं हरे, मिठ्ठू मियाँ देखो कितने खरे! विहान जब भी बाग में आता, मिठ्ठू मीठी बोली में गीत सुनाता। पहली कविता हमें सिखाती है कि पक्षी हमारे सबसे अच्छे मित्र होते हैं। विहान और उसका तोता मिठ्ठू हमेशा साथ रहते हैं।
रिमझिम-रिमझिम बारिश आई, विहान ने अपनी नाव चलाई। कागज की नैया, पानी की धार, चलो चलें हम उस पार! बारिश की बूंदों के साथ खेलना विहान को बहुत भाता है। वह अपनी रंगीन नाव को पानी के छोटे से पोखर में छोड़ देता है।
सूरज दादा सुबह-सुबह आते, सुनहरी धूप की चादर फैलाते। मिठ्ठू बोला, "उठो विहान भाई, देखो नई रोशनी है आई!" सुबह की ताज़गी और सूरज की पहली किरण हमें नया काम करने की प्रेरणा देती है।
रंग-बिरंगी तितली रानी, बड़ी चंचल और बड़ी सयानी। फूल-फूल पर जाकर बैठती, विहान के हाथ कभी न आती। बगीचे के फूलों पर मंडराती तितलियाँ बच्चों को कुदरत के रंगों से परिचित कराती हैं।
दादी माँ जब किस्से सुनातीं, परियों की दुनिया में ले जातीं। विहान सुनता आँखें फाड़, जैसे खड़ा हो कोई पहाड़! बचपन की सबसे हसीन यादें दादी माँ की कहानियों में बसी होती हैं, जो हमें अच्छे संस्कार सिखाती हैं।
गोल-मटोल सा चंदा मामा, पहन कर आता सफेद पाजामा। रात को जब विहान सो जाता, चंदा मामा लोरी सुनाता। रात का आसमान और चंदा मामा बच्चों को सुकून और चैन की नींद सुलाते हैं।
आम का पेड़ है बड़ा रसीला, फल है इसका पीला-पीला। मिठ्ठू ने एक आम गिराया, विहान ने उसे लपक कर खाया। गर्मी के मौसम में फलों के राजा आम का स्वाद और दोस्तों के साथ मिलकर खाना सबसे बड़ी खुशी है।
स्लेट और चौक लेकर हाथ, विहान चला पाठशाला के साथ। अक्षर-अक्षर ज्ञान बढ़ाना, जीवन में है आगे जाना। शिक्षा ही वह रास्ता है जो हमारे सपनों को सच करती है। विहान अब स्कूल जाने के लिए तैयार है।
"नन्हे कदम, सुनहरे सपने" की यह यात्रा यहीं समाप्त नहीं होती। दिनेश कुमार कीर की ये कविताएँ हर बच्चे के दिल में साहस और प्यार भर देती हैं। मानसरोवर साहित्य अकादमी कामना करती है कि हर बच्चा विहान की तरह अपने सपनों को पूरा करे।
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